Friday, February 20, 2026

शिवम राठौर को गिरफ्तार करने वाली टीम से न्यायालय ने वाद दर्ज कर स्पष्टीकरण किया तलब

- Advertisement -


पहले गंभीर धाराओं में प्रस्तुत की गयी रिमांड बाद में न्यायालय को सूचना दिये बगैर विलोपित कर दी गयी धाराएं
1 अक्टूबर को न्यायालय में पेश होंगे एसआईटी में सम्मिलित पुलिस कर्मी
धाराएं कम होने पर शुक्रवार को शिवम राठौर को मिल चुकी है न्यायालय से जमानत
पुत्र के जेल जाने के गम में पिता लक्ष्मीनारायण राठौर ने किया था आत्मदाह

ललितपुर। बजाज फाइनेंस कंपनी में हुए फर्जीवाड़े के मामले में पहले शिवम राठौर को गंभीर धाराएं लगाकर रिमांड प्रस्तुत कर जेल भेजने और फिर धाराएं कम कर नई रिमांड प्रस्तुत करने के मामले में पुलिस कठघरे खड़ी होती नजर आ रही है। मुख्य न्यायिक मजिस्टेªट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 210 के अन्तर्गत प्रर्कीण अपराधिक वाद दर्ज कर लिया है। साथ ही इस मामले में पुलिस अधीक्षक को स्पष्टीकरण नोटिस जारी किया गया है। अगली तिथि पर एसआईटी के समस्त पुलिस अधिकारियों के स्पष्टीकरण कराने के आदेश हुए है।
थाना कोतवाली ललितपुर में बजाज फाइनेंस कंपनी में हुए फर्जीवाड़े के मामले में मु0अ0स0 881/2025 धारा 318(4), 338, 336 (3) व 340 के अन्तर्गत मुकदमा पंजीकृत हुआ था। इस मामले में विवेचक द्वारा दिनांक 19 सितंबर 2025 को अभियुक्त शिवम राठौर पुत्र लक्ष्मीनारायण राठौर का रिमांड प्रस्तुत किया गया था। जिसमें मामले के सह अन्य अभियुक्तों द्वारा घटना में शिवम राठौर की संलिप्तता पायी गयी थी। मुख्य न्यायिक मजिस्टेªट द्वारा अभियुक्त शिवम राठौर का रिमांड दिनांक 19 सितंबर 2025 से 30 सिंतबर 2025 तक स्वीकृत किया गया था। इसके बाद 25 सितंबर को अभियुक्त शिवम राठौर की ओर से द्वितीय जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर कथन किया गया कि उक्त मुकदमा में अभियुक्त शिवम राठौर पर दर्ज धारा 61(2), 318(4), 338,336(3) व 340 (2) बीएनएस का लोप विवेचना के दौरान कर दिया गया है, अतः इसकी जमानत स्वीकृत कर ली जाये।
उक्त के क्रम में न्यायालय द्वारा पुलिस से मामले की आख्या तलब की गयी। जिसमें ज्ञात हुआ कि सभी धाराओं का लोप कर धारा 341(2) बीएनएस की बढ़ोतरी कर दी गयी है। विवेचक द्वारा पहले गंभीर धाराओं में रिमांड प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया। जिसमें अधिकतम आजीवन कारावास व गैर जमानतीय धारा थी। बाद में धारा विलोपित करने की जानकारी न्यायालय को मिली। विवेचक द्वारा पूर्व में इसकी जानकारी नही दी गयी। शिवम राठौर के अधिवक्ता ने यह भी कहा कि प्रस्तुत मुकदमा में पुलिस की गलत कार्यवाही के दबाव के चलते अभियुक्त शिवम राठौर के पिता लक्ष्मीनारायण राठौर ने आत्महत्या कर ली है। पुलिस के द्वारा अनावश्यक उत्पीड़न किये जाने का कथन भी किया गया। स्प्ष्टीकरण आदेश में कहा गया कि पुलिस ने पहले अनावश्यक रूप से आजीवन कारावास से दंडनीय धाराएं अभियुक्त शिवम राठौर पर लगायी और न्यायालय को सूचना दिये बगैर उपरोक्त सभी धाराओं का विवेचना के दौरान खत्म कर दिया गया। इससे प्रतीत होता है कि संबंधित पुलिस अधिकारियों द्वारा बिना किसी न्यायोचित विवेचना अत्यंत गंभीर धाराएं लगायी गयी। तथा पुलिस के अनावश्यक कार्यवाही के दबाव के चलते अभियुक्त शिवम राठौर के पिता द्वारा आत्महत्या करना न्यायालय के संज्ञान में लाया गया। ऐसी स्थिति में एसआईटी के समस्त पुलिस अधिकारियों के विरूद्ध प्रकीर्ण अपराधिक वाद दर्ज कर स्पष्टीकरण नोटिस जारी किया जाना न्याय संगत प्रतीत होता है। पुलिस अधीक्षक को भेजे गये पत्र में न्यायालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 210(1) के अन्तर्गत प्रकीर्ण अपराधिक वाद दर्ज कर 1 अक्टूबर 2025 को संबंधित पुलिस कर्मियों को सुनवाई में उपस्थित होने के निर्देश दिये गये है।

आप की राय

क्या INDIA गठबंधन 2024 चुनाव में पीएम मोदी और एनडीए को टक्कर दे पाएगा?

View Results

Loading ... Loading ...
Latest news
Related news